भारत में कितने लोगों को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है | Nobel Prize Winners in India in Hindi

प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय

 

Nobel Prize Winners of India in Hindi – नोबेल पुरस्कार को विश्व का सबसे महत्वपूर्ण और सम्मानित पुरस्कार माना जाता है। नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी और यह अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर दिया जाता है। 
 
अल्फ्रेड नोबेल डायनामाइट के अविष्कारक थे और स्वीडिश नागरिक थे। 
 
नोबेल पुरस्कार पांच क्षेत्रों में मानवता में सबसे बड़े योगदान के तौर पर दिया जाता है और यह पांच क्षेत्र हैं फिजिक्स, केमिस्ट्री, साहित्य, शान्ति और मेडिकल।
 
नोबेल पुरस्कार देने के लिए नोबेल फाउंडेशन की स्थापना 29 जून 1990 में की गई थी। 
 
अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार उनके द्वारा कमाई गई दौलत को नोबेल पुरस्कार के रूप में विजेताओं में बांट दी जाए।
 
विश्व का सबसे पहला नोबेल पुरस्कार W.C रॉन्टजन को फिजिक्स में, J.H. वांट हॉफ को कैमिस्ट्री में, E.V. बिहरिंग को मेडिकल में, सुली प्रुधोम्म (Sully Prudhomme) को साहित्य में और फेड्रिक पस्सी और हेनरी दुनांत को संयुक्त रूप से शांति के लिए दिया गया था
 
अर्थशास्त्र में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1968 मे स्वीडन सेंट्रल बैंक द्वारा की गयी थी
 

सबसे पहला अर्थशास्त्र में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार 1969 में दिया गया था और यह पुरस्कार संयुक्त रूप से रगनर फ्रिस्च और जन टीनबेर्गेन को दिया गया था

 

भारतीय को मिलने वाला नोबेल पुरस्कार – Indian Nobel Prize Winners in Hindi

अब तक सिर्फ 5 भारतीय को ही नोबेल पुरस्कार मिला है। बाकी
सब या तो भारत में पैदा हुए थे या तो उनका भारत से किसी न किसी तरह कोई
संबंध रहा है।
 

रविंद्र नाथ टैगोर – (1913)

रविंद्र नाथ टैगोर पहले भारतीय और पहले एशियाई थे जिनको नोबेल पुरस्कार मिला। 
 
रविंद्र नाथ टैगोर को साहित्य में “गीतांजलि” लिखने के लिए सन् 1913 में नोबेल पुरस्कार मिला था। 
 
रविंद्र नाथ टैगोर ने भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रीय एंथम की रचना भी की थी। रविंद्र नाथ टैगोर को 1913 में जब नोबेल पुरस्कार मिला तब वो ये पुरस्कार पाने वाले पहले गैर यूरोपीय थे
 

सीवी रमन – (1930)

सीवी रमन को फिजिक्स में रमन इफैक्ट के लिए सन् 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। 
 
सीवी रमन को भारत रत्न पुरुस्कार (1954) भी मिला था। सीवी रमण ने 11 साल में हाई स्कूल और 13 साल की उम्र में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। 
 
सीवी रमण ने मात्र 16 साल की उम्र में मद्रास यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल कर ली थी उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी भौतिक विज्ञानं में टॉप किया था
 

मदर टेरेसा – (1979)

मदर टेरेसा को शान्ति का नोबेल पुरस्कार सन् 1979 में दिया गया था। मदर टेरेसा ने गरीबों और रोगियों के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया था।
 

अमर्त्य सेन – (1998)

अमर्त्य सेन एक अर्थशास्त्री थे और उनको अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार सन् 1998 में मिला था।
 
अमर्त्य सेन ने अर्थशास्त्र में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अमर्त्य सेन को 1999 में भारत रत्न पुरस्कार भी मिला था
 

कैलाश सत्यार्थी – (2014)

कैलाश सत्यार्थी को सन् 2014 में शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। 
 
कैलाश सत्यार्थी को यह पुरुस्कार उनके एनजीओ के बचपन बचाओ आंदोलन के लिए मिला था। 
 
कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को साथ में यह नोबेल पुरस्कार मिला था।
 

भारत में पैदा हुए या भारत से सम्बन्ध रखने वाले लोगों को मिला नोबेल पुरस्कार  

अब हम उनकी बात करेंगे जो भारत में पैदा हुए या किसी तरह से भारतवंशी थे लेकिन नोबेल पुरुस्कार मिलते वक़्त वो भारतीय नागरिक नहीं थे।  

रोनाल्ड रॉस – (1902)

रोनाल्ड
रॉस को सन् 1902 में मेडिकल क्षेत्र में उनके योगदान के लिए नोबेल
पुरस्कार मिला था।  
 
इन्होंने मलेरिया के परजीवी प्लास्मोडियम के जीवन चक्र पर रिसर्च की थी। 
 
रोनाल्ड रॉस
भारत के अल्मोड़ा में पैदा हुए थे और ब्रिटिश नागरिक थे।
 

रूड्यार्ड किपलिंग – (1907)

रूड्यार्ड
किपलिंग को सन् 1907 में साहित्य में लेखन के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था।
 
रूड्यार्ड किपलिंग मुंबई में पैदा हुए थे और ब्रिटिश इंडियन नागरिक थे। रुडयार्ड किपलिंग की सबसे प्रसिद्द पुस्तक द जंगल बुक थी
 

हर गोविंद खुराना – (1968)

हर गोविंद खुराना को
मेडिकल के क्षेत्र में जेनेटिक्स और एंटीबायोटिक्स में उनकी रिसर्च के लिए
1968 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। 

 
यह पुरुस्कार संयुक्त रूप से हर गोविंद खुराना और M.W. निरेनबर्ग को दिया गया था। 
 
हर
गोविंद खुराना अविभाजित भारत के पंजाब यानि की मुल्तान (पाकिस्तान) में
पैदा हुए थे लेकिन जब इनको नोबेल पुरस्कार मिला तब ये अमेरिका के नागरिक
थे। 

 

सुभ्रमण्यन चंद्रशेखर – (1983)

सुभ्रमण्यन
चंद्रशेखर को फिजिक्स में उनकी खोज चंद्रशेखर लिमिट के लिए नोबेल पुरस्कार
सन् 1983 में दिया गया था। 
 
सुभ्रमण्यन चंद्रशेखर के अंकल सीवी रमन थे
जिनको पहले ही नोबेल पुरस्कार मिल चुका था। 
 
सुभ्रमण्यन चंद्रशेखर का जन्म लाहौर में हुआ था और जब इनको नोबेल पुरस्कार मिला तब ये अमेरिकी नागरिक थे।
 

V.S. नायपॉल – (2001)

V.S.
नायपॉल त्रिनिनाद में जन्में एक हिंदू ब्राह्मण परिवार से सम्बन्ध रखने
वाले ब्रिटिश नागरिक थे। 
 

इनको साहित्य में सन् 2001 में नोबेल पुरस्कार
मिला था। V.S. नायपॉल अधिकतर यात्रा से संबंधित किताबे लिखते थे।
  

 

आर के पचौरी – (2007)

राजेंद्र पचौरी इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के हेड थे जब इस संस्था को नोबेल पुरुस्कार मिला।   

 
यह संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक संस्था है जो पर्यावरण सुधर के लिए काम करती है।  

नोबेल पुरुस्कार आईपीसीसी को अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर के साथ संयुक्त रूप से मिला।

 

वेंकटरमन रामाकृष्णन – (2009)

वेंकटरमन
रामाकृष्णन को सन् 2009 में केमिस्ट्री में उनकी रिसर्च के लिए नोबेल
पुरस्कार दिया गया था।  
 
वेंकटरमन रामाकृष्णन ने आरएनए राइबोसोम के
स्ट्रक्चर में अपनी रिसर्च की थी। 
 
वेंकटरमन रामाकृष्णन भारत में पैदा हुए
थे लेकिन जब इनको नोबेल पुरस्कार मिला तब तक इनको ब्रिटिश और अमेरिकन नागरिकता मिल चुकी थी।
 
 

अभिजीत बनर्जी – (2019)

अभिजीत
बनर्जी को सन् 2019 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। यह
पुरुस्कार उनके विश्व गरीबी पर किए गए रीसर्च पर मिला था। 
 
यह पुरुस्कार
संयुक्त रूप से E. दुल्फो और M. क्रीमर के साथ अभिजीत बनर्जी को दिया गया
था। 
 
अभिजीत बनर्जी कोलकाता में पैदा हुए थे लेकिन जब इनको नोबेल पुरस्कार
मिला तब यह अमेरिका के नागरिक थे। 
 
E. दुल्फो (फ्रांस) इनकी वाइफ हैं और ये
दोनों MIT यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं।
इनको मिलाकर अब तक 6 दंपत्तियो को
नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
 

सबसे ज्यादा नोबेल जीतने वाला देश कौन सा है

अमेरिका ने सबसे अधिक बार नोबेल पुरस्कार जीता है। अमेरिका के बाद यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी दूसरे और तीसरे स्थान पर आते है। यह आंकड़ा 2022 तक का है।
 

नोबेल पुरुस्कार के विचित्र तथ्य

सबसे हैरान करने वाली बात ये है की महात्मा गांधी नोबेल
शांति पुरस्कार के लिए पांच बार (1937, 1938, 1939, 1947 और 1948) नामांकित
किए गए लेकिन एक बार भी उनको नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।

 

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जानिए गणित में नोबेल पुरस्कार क्यों नहीं दिया जाता

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