श्री कृष्ण जी की कितनी पत्नियां थी | Krishna Ji Ki Kitni Patniya Thi

 

श्री कृष्ण की कितनी पत्नियां थीं, श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियों का क्या है सच


Krishna Ji Ki Kitni Patniya Thi – भगवान कृष्ण की कितनी पत्नियां थीं और क्या सच में श्री कृष्ण जी की 16108 रानियां थीं। 
 
यह एक ऐसा प्रश्न है जो कई लोग संशय की नजर से पूछते हैं और हिन्दू धर्म का मजाक बनाने वाले लोग इस बात पर अपनी टिप्पणी जरूर करते हैं। 
 
तो आज हम आपको श्री कृष्ण जी की 16108 रानियों का सच बताएंगे। 
 
ताकि आपको अपने धर्म का सही ज्ञान हो सके और आप मूर्खों को सही जवाब दे सकें।
 
 

कैसे बनी 16108 रानियां


जो लोग ये बोलते हैं की श्री कृष्ण की 16108 पत्नियां थीं वो गलत है। 
 
एक दिन स्वर्ग के राजा इंद्र श्री कृष्ण के पास आकर बोले की हे कृष्ण पृथ्वी लोक, पाताल लोक और स्वर्ग लोग में असुर नरकासुर ने बहुत उत्पात मचा रखा है।  
 
नरकासुर भूमि से पैदा हुआ था इसलिए उसे भौमासुर भी कहते थे।
 
सब उसके अत्याचार से त्राहि त्राहि कर रहें हैं आप सहायता कीजिए।  
 
उसने पृथ्वी के कई राजाओं की कन्या को अपहरण करके बंदी बना लिया है और बंदी गृह में डाल दिया है। 
 
इसके साथ ही उसको ये आशीर्वाद भी प्राप्त है की वो सिर्फ किसी स्त्री के हाथों ही मारा जा सकता है। 
 
यह सुनकर श्री कृष्ण ने इंद्र की प्रार्थना स्वीकार की और पत्नी सत्याभामा के साथ गरुण पर सवार होकर प्रगज्योतिषपुर जहां नरकासुर रहता था की ओर निकल पड़े।  
 
प्रगज्योतिषपुर अब असम के नाम से जाना जाता है।
 
प्रगज्योतिषपुर पहूंच कर उन्होंने दैत्य मुर और उसके 6 पुत्रों का संहार कर दिया। 
 
जब यह बात नरकासुर को पता लगी तो वह अपनी पूरी सेना लेकर श्री कृष्ण से लड़ने के लिए युद्ध के मैदान में आ धमका। 
 
भयानक संग्राम के उपरांत श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध कर दिया। 
 
नरकासुर को मारने के पश्चात श्री कृष्ण ने नरकासुर के पुत्र को प्रगज्योतिषपुर का राजा बना दिया और वहां बंदी सारी कन्याओं को आजाद कर दिया। 
 
सामाजिक विरोध के कारण उन 16108 कन्याओं को समाज द्वारा लेने से इंकार कर दिया गया।  
 
पुरातन काल से दुर्भाग्य है कि अगर स्त्री के साथ जबरदस्ती
हुई तो उसे दोषी न मानकर उससे सहानुभूति भले ही दिखाई जाए पर उसे दूषित
ज़रूर मान लेते थे। 
 
मतलब इनके घर परिवार के लोग ही इनको नही अपनाते थे,ऐसे
में कृष्ण ने इनको सहारा दिया।
 
श्री कृष्ण ने उनको आश्रय दिया और इन सारी कन्याओं ने श्री कृष्ण को अपना सब कुछ मानकर द्वारकापुरी में कृष्ण भक्ति में रहने लगीं और वहीं वो भजन कीर्तन किया करती थीं और अपना जीवन सुखमय तरीके से काटने लगीं। 
 
वो सारी कन्याएं श्री कृष्ण को अपना पति मानती थीं क्योंकि श्री कृष्ण ने उनको नया जीवन दिया था और उनको नरकासुर के आतंक से बचाया था।
 
बहुत सी धार्मिक किताबों में इसे गलत तरीके से वर्णित किया है। 
 
जबकि सच ये है की ये 16108 कन्याएं श्री कृष्ण की पत्नियां नहीं थीं बल्कि ये उनकी भक्ति में लीन रहने वाली कन्याएं थीं।
 
जिस दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था उस दिन को हम नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली के नाम से मनाते हैं।
 
श्री कृष्ण जी के आठ पत्नियां थीं जिनका नाम है रूक्मणी, जामवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
 
 
 
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