क्या आपको पता है की चार धाम के नाम क्या हैं | Char Dham Ke Naam

Char Dham Kaun Kaun Se Hain


 

Char Dham Ke Naam – हिंदू धर्म में चार धाम यात्रा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और कहा जाता है की जिसने चार धाम की यात्रा कर ली वह जीवन के सारे पापों से मुक्त हो जाता है।

चार धाम को लेकर लोग बहुत दुविधा में रहते हैं और उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को ही चार धाम मान लेते हैं जबकि यह छोटा चार धाम या पहला धाम ही है। 

आईए जानते हैं की चार धाम कौन कौन से हैं

पहला धाम बद्रीनाथ (उत्तराखंड), दूसरा धाम रामेश्वरम (तमिलनाडु), तीसरा धाम द्वारका (गुजरात), और चौथा धाम जग्गनाथ पुरी (ओडिसा) है।
 

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ उत्तराखंड के चमोली जिले में है। यह धाम भगवान विष्णु जी को समर्पित है और इसकी स्थापना भगवान राम ने सतयुग में की थी। 
 
यह धाम 6 महीने खुला रहता है और 6 महीने बंद रहता है। ऐसा माना जाता है की भगवान विष्णु 6 महीने तक विश्राम करते हैं इसलिए इन 6 महीने यह बंद रहता है।
 
नवंबर से मार्च तक यह धाम बंद रहता है और अप्रैल से अक्टूबर तक खुला रहता है। यह हिमालय की चोटी पर स्थित है इसलिए 6 महीने बहुत अधिक ठंड और बर्फबारी होने के कारण यह बंद ही रहता है।
 
बद्रीनाथ को विशालपुरी के नाम से भी जाना जाता है। बद्रीनाथ के पास एक तप्त कुंड भी है यह कुंड हमेशा ही गर्म जल से भरा रहता है। 
 
बद्रीनाथ अलकनंदा नदी के किनारे बसा हुआ है और यह मंदिर समुद्र तल से 3133 मीटर की ऊंचाई पर है।
 
भगवान विष्णु और भगवान शिव हमेशा एक दूसरे का ध्यान करते हैं इसलिए भगवान विष्णु के मंदिर के पास शिव जी का मंदिर जरूर होता है जैसे बद्रीनाथ के पास केदारनाथ। 
 
जो लोग बद्रीनाथ जाते हैं वो केदारनाथ भी जाते हैं। मनुष्य को अपने जीवन काल में 2 बार बद्रीनाथ की यात्रा जरूर करनी चाहिए।

रामेश्वरम

रामेश्वरम तमिलनाडु के रामनाथपुरम नाम के जिले में स्थित है और यह एक द्वीप है जो हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से जुड़ा हुआ है। 
 
यह धाम भगवान शिव को समर्पित है और यह शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक भी है। 
 
रामेश्वरम के शिव लिंग की स्थापना स्वयं भगवान श्री राम ने की थी। यहां पर एक छोटा शिवलिंग और भी है जिसे रामनाथ स्वामी शिवलिंग भी कहते हैं। 
 
इसके पीछे भी एक कहानी है, रावण का वध करने के पश्चात जब श्री राम वापस लौट रहे थे तो ब्राह्मण हत्या के पाप से बचने के लिए उनको वहां शिव लिंग की स्थापना करके उसका पूजन करने को कहा गया। 
 
उन्होंने वहां शिवलिंग की स्थापना की और इसको उन्होंने काशी के बराबर मान्यता देने के लिए हनुमान जी से काशी से एक शिवलिंग लाने को बोला और हनुमान जी पवन के वेग से गए और एक शिवलिंग ले आए। 
 
यह शिवलिंग छोटा था और राम जी ने इस शिवलिंग की स्थापना रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के साथ ही कर दी। 
 
इसलिए वहां आपको 2 शिवलिंग दिखाई देंगे। रामसेतु
का उद्गम इसी स्थान से होता है। 
 
राम जी ने विभीषण के अनुरोध पर यह पुल धनुष्कोटि नामक जगह पर तोड़ दिया था।
 
रामेश्वरम शंख के आकार का एक द्वीप है
लेकीन पहले यह द्वीप नहीं था और भारत से जुड़ा हुआ था। 
 
लेकिन समुंद्र की
लहरों ने इसे मिलाने वाली रेखा को काट दिया जिसके कारण यह अलग होकर द्वीप
बन गया।
 

द्वारका

द्वारका धाम गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में स्थित है। द्वारका को श्री कृष्ण ने बसाया था और यह गुजरात की सबसे पहले बनने वाली राजधानी भी है। 
 
श्री कृष्ण जी के परलोक गमन के साथ यह नगरी समुद्र में डूब गई थी। आज भी इस नगरी के अवशेष समुद्र में डूबे हुए मिलते हैं।
 
कई वैज्ञानिक और जिज्ञासु आज भी श्री कृष्ण की बसाई इस नगरी के अवशेष खोजने में लगे रहते हैं।
 
यहां पर द्वारकाधीश मंदिर है जिसका निर्माण श्री कृष्ण जी के वंशजों ने करवाया था। 
 
यह मंदिर 3,000 साल पुराना माना जाता है। इसके दो द्वार हैं एक मोक्ष द्वार और दूसरा स्वर्ग द्वार। यह धाम श्री कृष्ण जी को समर्पित है।
 
द्वारका सात पवित्र पुरियों में से एक है और इसे द्वारका पुरी कहा जाता है।
 

जगन्नाथ धाम

जगन्नाथ धाम को जगन्नाथ पुरी भी कहते हैं यह मंदिर भी भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। 
 
जगन्नाथ पुरी ओडिसा के पुरी नामक जिले में स्थित है। इस मंदिर की स्थापना वैष्णव संप्रदाय के लोगों ने द्वापर युग में की थी। 
 
यहां पर तीन मूर्तियां हैं पहली जगन्नाथ जी की दूसरी उनके बड़े भाई बलभद्र जी की और तीसरी सुभद्रा जी की। 
 
यह तीनों मूर्तियां लकड़ी की बनी हुई हैं और इनको हर 12 साल में बदला जाता है। 
 
जगन्नाथ मंदिर में केवल हिंदू ही प्रवेश कर सकते हैं। 
 
जगन्नाथ पुरी में हर साल रथ यात्रा भी निकलती है और इस रथ यात्रा के पीछे भी एक कहानी है। 
 
एक बार भगवान जगन्नाथ से उनकी बहन सुभद्रा ने नगर भ्रमण की इच्छा जताई तो भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई बलभद्र ने रथ से उनको पूरे नगर की यात्रा करवाई इसलिए यह रथ यात्रा हर साल बड़े धूम धाम से निकाली जाती है। 
 
जगन्नाथ पुरी जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी तक है।
 
 
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