यदि भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो उसका संभावित परिणाम क्या होगा?

 

क्या भारत चीन को हरा सकता है?


भारत और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से  सीमा पर सब कुछ  ठीक नहीं चल रहा। एक के बाद एक नए विवाद हुआ करते हैं। डोकलाम के बाद तो ऐसा लगा था की युद्ध ही हो जायेगा। 

अगर भारत और चाइना के बीच युद्ध होता है तो कौन सा देश किस स्थिति में रहेगा और इसके क्या क्या परिणाम होंगे इसको जानने की सभी के मन में जिज्ञासा है। 

वैसे तो युद्ध का परिणाम युद्ध खत्म होने तक तो अनिश्चित ही होता है लेकिन कुछ आंकड़ों की मदत से हम ये तो जान ही सकते हैं की कौन सा देश अधिक फायदे या मजबूत स्थिति में होगा।

 

चीन और भारत विश्व की महाशक्ति 


चीन और भारत दोनों ही विश्व की महाशक्ति हैं और विश्व की अर्थव्यवस्था में क्रमशः दूसरे और पांचवे स्थान पर हैं। चीन के पास 21 लाख जवान है और भारत के पास 14 लाख। 
 
चीन और भारत दोनों की जनसंख्या लगभग बराबर ही है। कुल जनसंख्या में भारत में नौजवानो की संख्या चीन की तुलना में जायदा है।


जब प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध हुआ था तो पूरा विश्व दो गुटों में बटा हुआ था। और इन्हीं गुटो ने विश्व युद्ध के परिणाम तय किए। 
 
लेकिन अगर भारत और चीन में युद्ध हुआ तो ये काफी हद तक संभव है की अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ताइवान और इसराइल भारत की तरफ से परोक्ष या अपरोक्ष रूप में इस युद्ध में शामिल होगें। 
 
रूस भारत का मित्र है किंतु उसके व्यापारिक समझौते चीन के साथ भी काफी जायदा हैं इसलिए रूस किस तरफ रहेगा या वो न्यूट्रल रहेगा या  तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
 
अगर हम वायु सेना की तुलना करें तो निसंदेह चीन की वायु सेना भारत की तुलना में बहुत बड़ी है लेकिन भारत की वायु सेना श्रेष्ठ है। 
 
भारत के पास अमेरिका, फ्रांस, इजराइल, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों से प्राप्त उन्नत टेक्निकल एडवांस्ड लड़ाकू विमान है और साथ में भारत में निर्मित सुपीरियर मशीनें हैं जो आसमान और जमीन दोनो पर वार करने में सक्षम है। 
 
हमारी पेनेट्रेशन पॉवर चाइना से बहुत एडवांस्ड है साथ में हमारे पास अमेरिका से प्राप्त मल्टीरोल ग्लोब मास्टर और रूस का बना हुआ सबसे बड़ा मालवाहक जहाज गजराज भी है। 
 
और सबसे महत्वपूर्ण बात की हमारे पायलट चीन के पायलट की तुलना में काफी दक्ष और श्रेष्ठ हैं और यही चीज हमारी वायुसेना को चीन से हमें काफी आगे पहुंचा देती है।

अगर हम थल सेना की बात करें तो चीन की थल सेना हमसे बहुत बड़ी है। और चीन थल सेना में हमसे कहीं आगे है और टेक्नोलॉजिकल एडवांस्ड भी है। 

 
लेकिन समझने वाली बात ये है की चीन की सीमा हमारी सीमा से तीन गुना बड़ी है और वो अपनी सारी सेना सिर्फ भारत की तरफ नही लगा सकता क्युकी चीन के उसके सभी पड़ोसी देशों से सीमा विवाद चल रहे हैं। 
 
इसके अलावा एक और चीज है जो हमें चीन से बेहतर बनाती है और वो है सेना में भर्ती होने की या देश प्रेम की भावना।
 
जी हां भारत में आर्मी में वही लोग भर्ती होते हैं जो देश की सेवा करना चाहते है और जिनमें देश प्रेम कूट कूट कर भरा होता है जबकि चीन में ऐसा नहीं है। चीन में सेना में भर्ती होना एक अनिवार्यता है वहां जबरन लोगों को सेना में भर्ती किया जाता है 
 
जिससे की उनमें देश प्रेम का अभाव होता है और युद्ध के नाजुक मौके पर वो वहां से भाग सकते हैं। जबकि भारत में जब भी सेना की भर्ती होती है तो लगता है जैसे कोई मेला लगा हो और अभर्थी की भीड़ को काबू करना मुश्किल हो जाता है। 
 
तो आप समझ सकते हैं की युद्ध के वक्त क्या जोश और जुनून हमारे जवान दिखाते होंगे।

एक और बात है जो हमें चीन से बेहतर बनाती है और वो है युद्ध में शामिल होना। भारत आजादी के बाद से ही अपने पड़ोसियों से युद्ध में इंवॉल्व रहा है। जबकि चीन ने 1962 के बाद से कोई युद्ध नही लड़ा और लड़ा भी है तो वो बहुत ही कम अंतराल का। 
 
 
भारत चीन युद्ध हुआ तो


 

 
हमारी सेना को लगातार युद्ध में शामिल रहने का अपार अनुभव है। और ये अनुभव हमने 1967 में, नाथू ला और चो लॉ दर्रे में, डोकलाम में चीन को दिखाया है। 
 
सिक्किम में हुए नाथू ला और चो लॉ दर्रे के युद्ध( बहुत ही कम अंतराल के लिए झड़प हुई थी) में तो भारत के 88 वीर शहीद हुए थे वहीं चीन के 340 सैनिक मारे गए थे। 
 
वहीं 1979 में चीन और वियतनाम युद्ध में चीन बुरी तरह हारा था। वो तो 1962 के युद्ध में हमारे शीर्ष नेतृत्व में इच्छाशक्ति का अभाव था अन्यथा उस युद्ध में हमें पराजित ना होना पड़ता।

महत्वपूर्ण बात ये भी है की चीन में one child policy है जिसके कारण वहां के माता पिता अपने बच्चों को खोना नहीं चाहते और इसलिए वो डरपोक भी होते है। की कहीं युद्ध में हमारे बच्चे को कुछ हो ना जाए। 
 
वहीं भारत में ऐसा कोई नियम नहीं है और इसी कारण यहां के पैरेंट्स अपने बच्चों को खुशी खुशी सेना में भेजते है और भारत में सेना में जाना एक बहुत ही सम्मान की बात होती है। 
 
जो की यहां का जवान बहुत अच्छी तरह जानता है। और यही कारण है की युद्ध में हमारे जवान अंतिम सांस तक और लहू के आखिरी बूंद तक देश के लिए लड़ते हैं।

जय हिंद🇮🇳



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